खुलासा: गुरमीत राम रहीम को बचाने में जुटी थी कांग्रेस

 खुलासा- बाबा को बचाने में जुटी थी कांग्रेस, केस बंद करने का डाला था दबाव : पूर्व जोइन्ट डायरेक्टर सीबीआई

2002 में केस दर्ज होने के बाद भी जब राज्य सरकार ने कोई एक्शन नहीं लिया तब हाईकोर्ट ने सीबीआई को जांच सौैंपी। मगर कांग्रेस सरकार ने जांच अधिकारी को केस बंद करने के लिए कह दिया था।


बलात्कार के मामले में फंसे गुरमीत राम रहीम को 2007 में केंद्र और राज्य की तत्कालीन कांग्रेसी सरकारें बचाना चाहती थी। इसके लिए पार्टी के दिग्गज नेताओं ने भरसक कोशिशें की। दिल्ली में मनमोहन से लेकर चंडीगढ़ में हुड्डा सरकार में बैठे कांग्रेसी नेताओं ने जांच से जुड़े सीबीआई अफसरों के खूब फोन घनघनाए। यहां तक कि उन्हें धमकी भी दी। डेरा के गुर्गों ने अफसरों के ठिकानों तक पहुंचने की कोशिश की। फिर भी ईमानदार सीबीआई अफसरों को न कांग्रेसी नेता और न ही डेरा के गुर्गे प्रभावित कर सके। यही वजह कि पहले कांग्रेस की सत्ता में और 2014 के बाद से भाजपा सरकार से नाता जोड़ने के बाद भी यह ढोंगी बाबा नहीं बच सका।

कांग्रेस की ओर से केस बंद करने का दबाव डाले जाने का  खुलासा खुद केस की जांच करने वाले सीबीआई के रिटायर्ड डीआइजी मुलिंजा नारायणन ने किया है। जब 2007 में यह केस नारायणन को जब सौंपा गया तो न केवल बाबा के गुंडों ने धमकी दी, बल्कि तमाम नेताओं के दबावों से भी लड़ना पड़ा।
वीडियो यहाँ से देखे :-
https://m.youtube.com/watch?v=P7LFuVVlKZ4

क्या कहते हैं सीबीआई के डीआइजी

नारायणन कहते हैं कि हाईकोर्ट के आर्डर पर केस की जांच उन्हें मिली थी। यूं तो एफआइआर 2007 में ही दर्ज हो गई थी, मगर पांच साल तक कुछ भी नहीं हुआ इस केस में। जिसके बाद इस केस को हाईकोर्ट ने सीबीआई को दे दिया। ताकि निष्पक्ष जांच हो सके।  नारायणन के मुताबिक कई वरिष्ठ अफसरों के साथ बड़े नेता नहीं चाहते थे कि गुरमीत का बाल भी बांका हो। हरियाणा के तमाम सांसद और विधायकों ने उन्हें फोन किए।  यही नहीं डेरा के गुर्गे उनका घर भी खोजने में जुटे रहे।

अफसर के मुताबिक बलात्कार की शिकार उन साध्वियों को तलाशना कोई आसान काम नहीं था। पत्र होशियारपुर से भेजने का पता चला, मगर इसके पीछे कौन था, यह तलाशना टेढ़ी खीर रहा। बहुत मुश्किल से हम पीड़िता तक पहुंचे और उनके परिवार को सीआरपीसी के अंडर सेक्शन 164 के तहत मजिस्ट्रेट के सामने बयान रिकॉर्ड करने के लिए तैयार कर पाए।

बाबा से पूछताछ कर पाना सबसे मुश्किल भरा

सीबीआई के तत्कालीन डीआइजी नारायणन कहते हैं-रसूखदार गुरमीत राम रहीम से पूछताछ कर पाना सबसे मुश्किल का काम था। बहुत मुश्किल से गुरमीत को पूछताछ के लिए राजी किया जा सके। वह भी सिर्फ डेढ़ घंटे के लिए। मगर एक बार गुरमीत कब्जे में आया तो ढाई घंटे बैठाकर पूछताछ किए। उसने बहुत विनम्रतापूर्वक सारे आरोपों से इन्कार कर दिया।  सीबीआई में  इंस्पेक्टर से डीआइजी होकर 2009 में रिटायर हुए नारायणन का मानना है कि गुरमीत के खिलाफ हत्या के दोनों मामले भी बहुत मजबूत हैं। जैसे रेप का केस मुकाम तक पहुंच गया, वैसे ही हत्या के मामले में भी ढोंगी बाबा को सख्त सजा मिलेगी।
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